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ए.एम.यू. में उर्दू विभाग में प्रो.आले अहमद सरुर पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया।

अलीगढ़ मुसिलम विश्वविधालय के उर्दू विभाग के सेंटर आफ एडवांस स्टडीज के तत्वाधान में प्रख्यात उर्दू आलोचक प्रो. आले अहमद सरूर पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के उदघाटन सत्र में मुख्य भाषण देते हुए खुदा बख्श लाइब्रेरी पटना के पूर्व निदेशक डा. आबिद रजा बेदार ने कहा कि प्रो. आले अहमद सरूर ने धर्म राजनीति, शिक्षा, समाज और साहित्य में अनेक क्रानितकारी कार्यों को अन्जाम दिया और वह एक महान समाज सुधारक थे।
उन्होंने कहा कि प्रो. आले अहमद सरूर ने अपने लेखन द्वारा युवाओं की एक पूरी नस्ल को तैयार किया था और उनकी रचना नये पुराने चिराग ने जो सफलता अर्जित की वो उनके अन्य संग्रहों को प्राप्त नहीं हो सकी। वह आधी शताब्दी गुजर जाने के बाद आज भी प्रासंगिक हैं। आले अहमद सरूर ने यह सन्देश दिया कि साहित्य की आलोचना से हट कर वासिवकता को को प्रस्तुत करती है। उन्होने आलोचनात्मक अध्यन के लिए जो विषय चुने उसको बड़े ही प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
डा. आबिद रजा बेदार ने कहा कि प्रो. आले अहमद सरूर की रचना हिन्दुस्तान किधर उनके साहित्यक जीवन का अहम पड़ाव है इसमें समिमलित लेखों में प्रो. आले अहमद सरूर ने भारतीय मुसलमान, अलीगढ़ एवं उर्दू की सिथति पर प्रकाश डाला। उनका मानना था कि बुद्वजीवियों का काम देश की सिथति की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। उन्होंने देश व समुदाय की उन्नति के सपने देखे। डा. बेदार ने बदायुँ की तीन महान व्यकितयों हजरत ख्वाजा निजाम उददीन ओलिया, आले अहमद सरूर और सैयद अनवर जलाली को श्रद्वांजलि भी पेश की।
राष्ट्रीय सेमिनार के संयोजक प्रो. अबुल कलाम कासमी ने कहा कि प्रो. आले अहमद सरूर आलोचक, कवि एवं अलीगढ़ आन्दोलन के पक्षधर रहे और उन्होंने ही उर्दू विभाग को वासितवक रूप से विश्व के मानचित्र पर लाने का काम किया और हाल ही में उनकी कुलिलयात भी प्रकाशित हुर्इ है। उन्होंने कहा कि आले अहमद सरूर की गणना अल्लामा इकबाल के बड़े जानकारों में भी की जाती है।
उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद जाहिद ने कहा कि राजा वह भी होता है जो जनता के âदय पर हुकुमत करना है और उर्दू साहित्य के साहित्यकार जनता के दिलों पर राज करते हैं। उन्होंने प्रो. आले अहमद सरूर के साहित्यक सेवाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रो. काजी अफजाल हुसैन ने कहा कि आले अहमद सरूर ने कर्इ दशक पूर्व भारत और अलीगढ़ किधर जैसे विषय पर कलम उठाया जिसकी प्रासंगिकता आज भी है। प्रो. अथर सिददीकी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रो. आले अहमद सरूर से जुड़ी अपनी यादों को ताजा करते हुए उनके साहित्यक कारनामों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उर्दू विभाग की वार्षिक पत्रिका ”रफतार का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में प्रो. पदम श्री प्रो. काजी अब्दुल सत्तार, प्रो. इफितखार आलम, प्रो. सर्इदुज जफर जगतार्इ, प्रो. जकिया सिददीकी, प्रो. काजी जमाल हुसैन तथा प्रो. तारिक छतारी समेत बड़ी संख्या में विभाग के अध्यापक, शोधार्थी एवं छात्र उपसिथत थे।
बार्इट:-प्रो. काजी जमाल हुसैन (कार्डिनेटर)

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