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17 अक्टूबर का दिन एक अहम् दिन है क्युकी, इस दिन एक महान शख्स “सर सैयद अहमद खान” जन्म हुआ !

नई दिल्ली | सर सैयद अहमद खान का जन्म दिल्ली के एक समृद्ध व प्रतिष्ठित परिवार में 17 अक्टूबर सन 1817 को हुआ था. इनके पिता का नाम मीर मुत्तकी तथा माता का नाम मीर अजिजुत्रिसा बेगम था. इनकी शिक्षा अरबी, फ़ारसी, हिंदी, अंग्रेजी के अनेक प्रतिष्ठ विद्वानों द्वारा हुई. इन्होने ज्योतिष, तैराकी तथा निशानेबाजी का भी अभ्यास किया !

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सर सैयद अहमद खान पहले मुग़ल दरबार में नौकरी करते थे. बाद में मुग़ल दरबार छोड़कर वह अंग्रेजो की नौकरी करने लगे. विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए वे सन 1876 में बनारस के स्माल काजकोर्ट के जज पद से सेवानिवृत हुए. अंग्रेजो ने इनकी सेवा व निष्ठा को देखते हुए इन्हें ”सर” की उपाधि से बिभूषित किया. अहमद साहब मितब्ययी थे. वे अपने वेतन का अधिकांश भाग अपनी माँ के पास भेज देते थे ताकि परिवार का खर्च सरल और सहज रूप में चलता रहे. इन्होने सन 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम को पास से देखा था और इस पर एक पुस्तक ‘असबाबे बगावते हिन्द’ (भारतीय विद्रोह के कारण) लिखकर यह बताया की इस विद्रोह के कारण क्या थे !

उनकी दृष्टि में विद्रोह का मूल कारण भारतीयों को कानून बनाने से दूर रखना था. वे एक विचारक और चिन्तक थे. उन्होंने देखा की भारतीय मुस्लिम समाज दिशा – निर्देश के अभाव में पिछड़ता जा रहा है. वे इस्लाम धर्मानुयायियो में ”बौद्धिक चेतना” प्रदान कर नयी दिशा देना चाहते थे. इसके लिए इन्होने ‘तहजीबुल एखलाक’ नामक पत्रिका निकाला. उनका कहना था की धर्मशास्त्रीय ज्ञान के साथ – साथ आधुनिक विषयों और विज्ञान का ज्ञान प्राप्त करना आवश्यक है. यही कारण था की उन्होंने उस समय प्रचलित पारम्परिक शिक्षानीति का विरोध किया. वे मानते थे की शिक्षा का उद्देश्य छात्र की बौद्धिक चेतना को उजागर करना व उसके व्यक्तित्व का निखार करना है !

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शिक्षा के विकास के लिए सर सैयद अहमद खान ने अनेक संस्थायें खोली. इनमे मुरादाबाद का एक फ़ारसी मदरसा, साइंसटिफिक सोसाइटी अलीगढ आदि प्रमुख है. मुस्लिम समाज में आधुनिक शिक्षा को लोकप्रिय बनाने के लिए उन्होंने ”मोहम्मडन एजुकेशन कांफ्रेंस” की भी स्थापना की. सन 1873 में एक अन्य समिति का गठन किया गया जिसका उद्देश्य अलीगढ में एक कॉलेज की स्थापना करना था. इस कॉलेज के लिए समाज के सभी वर्ग के लोगो ने चंदा किया.

इस प्रकार सन 1875 में ‘मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज’ की अलीगढ़ में स्थापना हुई. यही कॉलेज आगे चलकर ‘अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय’ के नाम से विकसित हुआ. भारतीय समाज के सर सैयद अहमद खान की यह अमूल्य देन है. मुक्त विचारो, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, साम्प्रदायिक सौहार्द के कारण उनका सर्वत्र सम्मान होता था. अंग्रेज सरकार ने प्रसन्न होकर इन्हें ” नाइट कमांडर ऑफ़ स्टार ऑफ़ इंडिया ” ( के. सी. एस. आई. ) की उपाधि तथा एडिनबरा विश्वविद्यालय ने ” डॉक्टर ऑफ़ लॉ ” की मानक उपाधि से सम्मानित किया.

27 मार्च सन 1898 को इस महान शिक्षाविद् का निधन हो गया.

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