Home » ए.एम.यू » मीडिया की AMU को बदनाम करने की साजिश, मुजम्मिल हुसैन के नहीं आतंकियों से संबंध

मीडिया की AMU को बदनाम करने की साजिश, मुजम्मिल हुसैन के नहीं आतंकियों से संबंध

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) को बदनाम करने की साजिश के तहत एक के बाद एक मीडिया में एएमयू के छात्रों के लापता होने और आतंकी संगठनों से जुड़ने की अपुष्ट खबरे आ रही है. जिनका कोई आधार न होने के बावजूद बड़े-बड़े मीडिया हाउस इन खबरों को प्रकाशित कर छात्रों के भविष्य से खेल रहे है.

ताजा मामला एएमयू छात्र, मुज़म्मिल हुसैन से जुड़ा है. जिसके लापता होने और आतंकी संगठन से जुड़े होने की खबर प्रकाशित की जा रही है. बल्कि वह जिऑलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया में नौकरी कर रहा है. साथ ही हुसैन एमईसीएल, सेमिनरी हिल, 17 अक्टूबर, 2016 से नागपुर में रह रहे हैं.

एएमयू प्रशासन ने हुसैन के लापता होने की खबर को खारिज करते हुए कहा कि मीडिया के एक सेक्शन द्वारा दी गई जानकारी तथ्यों का गलत ब्योरा है, जो बहुत गलतफहमी पैदा कर रही है. विश्वविद्यालय इन अख़बारों की रिपोर्टों के लिए अपवाद लेता है जो असत्यापित और अनौपचारिक जानकारी देती हैं.

ध्यान रहे मुजम्मिल हुसैन जम्मू-कश्मीर के बारामूला के रहने वाले हैं. जिऑलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया में चयन के बाद मुजम्मिल ने नौकरी जॉइन करने के बाद से ही उन्होंने जुलाई 2017 में हॉस्टल छोड़ दिया था. हालांकि जम्मू-कश्मीर के रहने वाले लापता एएमयू के पीएचडी छात्र मन्नान वानी का अभी तक अता-पता नहीं है.

इस सबंध में पुलिस का कहना है कि अभी ये कहना जल्दबाजी होगा कि वानी ने आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन जॉइन कर लिया है. वहीँ दूसरी और मन्नान वानी को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) ने निष्कासित कर दिया है.

The post मीडिया की AMU को बदनाम करने की साजिश, मुजम्मिल हुसैन के नहीं आतंकियों से संबंध appeared first on Aligarh Khabar Hindi News.

63 total views, 1 views today

अपनी राय दें

comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

x

Check Also

AMU में बड़े ही ख़ुलूस के साथ जश्ने ईद मिलादुन्नबी मनाई गई

दुनिया भर के मुसलमान इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मुहम्मद (सल्ल.) का जन्मदिवस बड़ी ख़ुशी के साथ मना रहे है. ऐसे में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भी नबी ए करीम (सल्ल.) के आमद का जश्न बड़े ही खुलूस के साथ मनाया गया. इस्लामिक साल हिजरी के अनुसार हजरत मुहम्मद (सल्ल.) साहब का जन्मदिवस रबी-उल-अव्वल की 12 तारीख को मनाया जाता है. हजरत मुहम्मद (सल्ल.) साहब के जन्म दिवस को जश्ने ईद मिलादुन्नबी, मिलाद आदि नामों से जाना जाता है.

‘पद्मावती’ विवाद में भाजपा नेता का इस्तीफ़ा, मनोहरलाल खट्टर को सुनाई खरी खोटी

चंडीगढ़ । फ़िल्म ‘पद्मावती’ का विरोध कर रहे भाजपा नेता सूरजपाल अम्मू ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। वो हरियाणा में भाजपा के चीफ़ मीडिया कोऑर्डिनेटर थे। अम्मू ने इस्तीफ़े के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को ज़िम्मेदार ठहराया। यही नही उन्होंने खट्टर को ख़ूब खरी खोटी सुनाते हुए कहा की मैंने आज तक इतना घमंडी भाजपा मुख्यमंत्री नही देखा। बताते चले की फ़िल्म ‘पद्मावती’ के विरोध में सूरजपाल अम्मू ने संजय लीला भंसाली और दीपिका पादुकोण का सर काटने वाले को दस करोड़ रुपए देने का एलान किया था। हालाँकि भाजपा ने इसके लिए अम्मू का नोटिस भी थमाया था। उनके इस्तीफ़े को इसी नोटिस के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। बुधवार को उन्होंने मीडिया से रूबरू होते हुए अपने इस्तीफ़ा की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने एनसी नेता और सांसद फ़ारूख अब्दुल्ला को भी ललकारा। अम्मू ने कहा,’ सुबह सपना आया था और कुछ लोग शहादत मांग रहे थे। मैंने भारी मन से इस्तीफ़ा दिया है। मैं हरियाणा के सीएम के व्यवहार से दुखी हूं। मैंने इतना घमंडी बीजेपी सीएम कभी नहीं देखा है, जिसे अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं और समुदाय के प्रतिनिधियो..

AMU में शिया-सुन्नी करे एक साथ पढ़ाई, लड़के-लड़की बैठे साथ: UGC

अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय से मुस्लिम शब्द हटाने के सुझाव के बाद अब यूजीसी की एक समिति ने विश्विद्यालय में छात्र और छात्राओं को एक साथ बिठाकर शिक्षा देने की वकालत की है. UGC की इस समिति ने मोदी सरकार को भेजे अपने प्रस्ताव में AMU में छात्र-छात्राओं के अलग-अलग क्लासरूम को लेकर आपत्ति जताई. साथ ही कहा कि इस व्यवस्था के चलते छात्र प्रोफेशनल कोर्स और फिर पढ़ाई के बाद नौकरी के दौरान भी अपनी झिझक दूर नहीं कर पाते. समिति ने कहा कि इस वजह से उन्हें कई बार इसका नुकसान भी उठाना पड़ता है. समिति ने अपने प्रस्ताव में शिया-सुन्नी का भी मसला उठाते हुए विश्विद्यालय में शिया और सुन्नी के लिए अलग-अलग डिपार्टमेंट पर भी आपत्ति जताई. समिति में शामिल विशेषज्ञों का कहना कि जब शिया और सुन्नी दोनों एक ही धर्म पर आधारित पढ़ाई करवाते हैं तो फिर दो अलग-अलग डिपार्टमेंट क्यों? समिति ने साथ ये भी सलाह दी है कि विश्वविद्यालय में स्नातक के कोर्सों के लिए दाखिले इंजीनियरिंग और मेडिकल के तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा से होने चाहिए. समिति ने परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र, परीक्षा और रिजल्ट आदि का सेटअप तैयार कर..