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बुलेट चलाती AMU की लड़कियां

अलीगढ़ – जब भी बात की जाती है मुस्लिम महिलाओं, तब मीडिया मुस्लिम महिलाओं को बेचारा, बुर्के में ज़बरदस्ती ठूंसी हुई, रोटी चूल्हा करती महिला की छवि लेकर चलती है. पिछले पखवाड़े तीन तलाक को लेकर जिस तरह देशव्यापी हंगामा हुआ उसे देखकर आम भारतीय अपने दुःख दर्द भूलता सा महसूस हुआ, हालाँकि यूपी विधान सभा चुनाव में मिली जीत को भाजपा ने मुस्लिम महिलाओं से मिली वोटो की जीत तक कहा लेकिन चूँकि मतदान गोपनीय होता है इसलिए यह सब चुनावी अटकले ही रह गयी.

अगर बात की जाए मुस्लिम घरेलु महिला की तो मीडिया जो छवि हमें दिखाता है वो महिला भी बेचारी घर में बुर्के से लदी-दबी कुचली नज़र आती है, बेचारी पर ज़ुल्म भी इतना है की सोती भी बुरका पहनकर ही है. भरोसा ना हो तो गूगल का यह स्क्रीनशॉट देखें. अब वो बात अलग है की दुनिया की प्रथम यूनिवर्सिटी एक मुस्लिम महिला फातिमा अल-फिहरी ने स्थापित की थी.

muslim house women

वहीँ अगर ऐसे में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढने वाली मुस्लिम लड़कियों की बात की जाए तो उनको लेकर भी कहानी कुछ ज्यादा अलग नही आती लेकिन जैसे जैसेह्लात बदल रहे है वैसे वैसे लोगो की सोच भी बदलती जा रही है, यूं तो मुस्लिम लड़कियां पहले से ही प्रत्येक क्षेत्र में आगे रही हैं चाहे वो मधुबाला हो या मुमताज़, नर्गिस हो या जीनत अमान. यहाँ तक हमारे पडोसी मुल्कों में भी प्रधानमत्री की कुर्सियों में महिलाओं का कब्जा रहा है वहीँ इसके उलट पश्चिमी संस्कृति का झंडा उठाने वाले अमेरिकियों को एक महिला राष्ट्रपति तक गवारा नही है.

अलीगढ की मुस्लिम महिलाओं को लेकर एक विडियो सामने आया है जिसमे लड़कों को पीछे छोड़ती लड़कियों एक अलग ही अंदाज़ में बुलेट चलाती नज़र आ रही हैं. यह विडियो पोस्ट करते है प्रसिद्ध पत्रकार मोहम्मद अनस लिखे हैं की यह वीडियो अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी की छात्राओं का है। वुमेन कॉलेज में चुनाव प्रचार का इनका तरीका देख आप बेहोश भी हो सकते हैं। मीडिया तथा फेसबुकिया बकैत लोग देख लें कि एएमयू की लड़कियां कैसी होती हैं। वे लोग तो ज़रूर देखें जो एएमयू का नाम सुनते ही नाक मुंह सिकोड़ने लगते हैं। हिजाब को औरतों की आज़ादी में रूकावट बताने वाली ‘सो कॉल्ड फेमिनिस्ट’ महिलाएं इसे देखें और घर पर साईकिल चलाने की प्रैक्टिस करें क्योंकि बुलेट तो एएमयू की ‘दबी-कुचली-सताई’ गई लड़कियां चला रही हैं। ज़िंदाबाद।

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